Sikh Religion सिख धर्म-2020-In Hindi

Sikh Religion सिख धर्म-2020-In Hindi

सिख धर्म Sikh Religionकी स्थापना 15वी सदी में सतगुरु नानक देव ने की। वे पहले सिख गुरु बने और उनकी आध्यात्मिक शिक्षाओं ने उस नींव को स्थापित किया जिस पर सिख धर्म का गठन हुआ था। सिख धर्म एक एकेश्वरवादी धर्म है, जो मानता है कि ईश्वर आकारहीन और अदृश्य है। यह सांसारिक भ्रम (माया), कर्म और मुक्ति की अवधारणाओं को भी सिखाता है। इस धर्म की कुछ प्रमुख प्रथाएँ हैं ध्यान और गुरबानी का पाठ, जो गुरुओं द्वारा रचित भजन हैं। धर्म न्याय और समानता की भी वकालत करता है और अपने अनुयायियों से मानव जाति की सेवा करने का आग्रह करता है।

गुरु नानक देव जी सिख समुदाय के प्रथम है , उनका जन्म 15 अप्रैल 1469 को पूरनमासी के दिन तलवंडी राय भोई के एक गांव में हुया था । जो आज (वर्तमान पंजाब, पाकिस्तान) में है । गुरु जी का जन्म खत्री जाती के बेदी परिवार में हुआ आपके पिता जी का नाम मेहता कालू था आपके पिता जी पटवारी का काम करते थे। उनकी माता जी का नाम तृप्त देवी था ।

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गुरु नानक देव जी का संसार आगमन विष्व के धार्मिक एतिहासि की सबसे बड़ी घटना माना जाता है । गुरु नानक देव जी जब सुल्तानपुर में रहते थे , तो हर रोज की तरह सतलुज की साहसिक नदी ‘’काली बेई” नदी में स्नान करने जाते थे । वहां पे एक बेर का वृक्ष था , उसके नीचे बैठ कर वे ईश्वर का नाम जपते थे । वे वृक्ष आज भी गुरु बेर के नाम से प्रसिद्ध है और वहां मौजूद है।

सिख परंपरा के अनुसार एक दिन गुरु नानक देव स्नान करने के लिए नदी में गये और तीन दिन लुप्त रहे , दरसल गुरु इस समय समाधि में थे और उन्हें सच्चे ज्ञान की प्राप्ति होई । ज्ञान प्राप्ति के बाद उन्होंने सब से पहले ना को हिंदू ना को मुसलमान शब्द कहे । इसका अर्थ था कि वे सब एक परमात्मा की सन्तान हैं और दोनों ही अपने मार्ग से भटक गये हैं। गुरु जी ने इन्हें सच्चा उपदेश देकर सबका मार्ग दर्शक किया ।

सिख सब्द का अर्थ है शिष्य अर्थात गुरु का शिष्य सिख धर्म के दस गुरु है।

उस समय चारों और कुरीतियों का बोलबाला था। इस समय सामाजिक दशा बहुत ही ख़राब थी सभी धर्म अंध विश्वास, बाहरी दिखावे में बंध कर रह गए थे, और लिए सतगुरु नानक देव ने ऐसे कलयुग समय में एक ऐसे धर्म की स्थापना की जो एक ही गुरु में आस्था रखे। सिख धर्म Sikh Religion के धार्मिक स्थल को गुरुद्वारा कहते हैl गुरुदुआरे में दिन रात लंगर चलता रहता है। सिख धर्म किसी खास ज़ाती के लोगों के लिए नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए हैं।

सिख धर्म | Sikh Religion-2020-In Hindi गोल्डन टेम्पल (हरिमंदिर साहिब) सिख धर्म | Sikh Religion

भारत के उत्तर-पश्चिमी सिरे पर द गोल्डन टेम्पल या हरिमंदिर साहिब स्थित है, जो अनिवार्य रूप से दुनिया भर में 20 मिलियन सिखों के लिए पृथ्वी पर सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मध्य है। यहाँ सभी क्षेत्रों के लोगों को गुरु ग्रंथ साहिब के भजन और उपदेश सुनने और एक सांप्रदायिक भोजन (लंगर) के लिए एकता में बाधा डालने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इसका उदेश्य ही मानवता का कल्याण करना और मार्ग दर्शन करना है। यह पवित्र गुरुद्वारा (मंदिर) सभी 4 तरफ से प्रवेश करता है, एक प्रतीक है कि यह धर्म “सभी जातियों और सभी पंथों के लोगों के लिए है। सिख धर्म के धार्मिक ग्रं आदि ग्रंथ या श्री गुरु ग्रंथ साहिब और दशम ग्रंथ हैं। इसमे गुरुओ सेहत संतों, फकीरों की बानी भी शामिल हैं।

सतगुरु नानक देव ने देश देशांतर में जाकर सिख धर्म को फैलाया। सिख इन्हें प्रथम गुरु मानते हैं, और उन के बाद में नौ गुरुओ ने धर्म का प्रचार किया।

सिख धर्म | Sikh Religion के सतगुरु

1 गुरु नानक देव जी 2 गुरु अंगद देव जी

3 गुरु अमर दास जी 4 गुरु राम दास जी

5 गुरु अर्जन देव जी 6 गुरु हरि गोबिंद जी

7 गुरु हरि राय जी 8 गुरु हरि कृष्ण जी

9 गुरु तेग बहादुर जी 10 गुरु गोविंद सिंह जी


सिख धर्म में मूर्ति पूजा और कर्मकाण्ड वर्जित है वह गुरु ग्रंथ साहिब जी को ही अपना गुरु मानते हैं। गुरु नानक जी के बाद 9 अलग-अलग निवास गुरु हुए हैं। गुरु गोविंद सिंह जी ने सन 1699 में खालसा पंथ की साजना की। खालसा पंथ मे पाँच ककारों का काफी महत्व है यह पांच ककार इस तरह हैं:-

  • केश आध्यात्मिकता का प्रतीक है। यह व्यक्ति को गुरु की तरह व्यवहार करने की याद दिलाता है। (पुरुष सदस्य बालों पर पगड़ी बांधते हैं।)
  • किरपान, या औपचारिक तलवार, गरिमा का प्रतीक है। यह एक हथियार नहीं माना जाता है ।
  • कंघा या कंघी, स्वच्छता और आत्म-अनुशासन का प्रतीक है।
  • कड़ा या एक धातु कंगन, कर्मों में संयम का प्रतीक है और भगवान की भक्ति के लिए एक अथक अनुस्मारक है।
  • कच्छ यह आत्म-नियंत्रण और शुद्धता का प्रतीक है।

सिख धर्म Sikh Religion-2020-In Hindi गुरु गोविंद सिंह जी खालसा पंथ की साजना सिख धर्म Sikh Religion

सिख धर्म Sikh Religion इस ग्रह का पांचवा सबसे बड़ा विश्वास है। यह एक प्रगतिशील विश्वास के रूप में शुरू हुआ जिसने जाति, पंथ, या नस्ल के सभी भेदों को खारिज कर दिया। इसने लड़कियों की कुल समानता को एक ऐसे समय में स्वीकार किया जब महिलाओं को संपत्ति या पुरुषों का अवकाश माना गया है, जब स्त्री-शिशु हत्या और विधवा जलना लगातार जारी था। सिख धर्म में इस्त्री का सम्मान किया जाता है ।

सो क्यों मंदा आखीऐ जित जम्मे राजान

यह पंक्तियाँ गुरु नानक देव जी के द्वारा लिखी गई हैं । सिख धर्म की विरासत ईश्वर की भक्ति करना और सच्चा निवास करने पर जोर देती है।

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